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भगवान श्रीचंद्र ने कुरीतियों को दूरकर समाज में समरसता का वातावरण बनाया: स्वामी रामदेव

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– श्रीचंद्र जयंती के उपलक्ष्य में उदासीन अखाड़ों ने निकाली शोभायात्रा

हरिद्वार, 30 अगस्त (Udaipur Kiran) । उदासीनाचार्य भगवान श्रीचंद्र की 531वीं जयंती के उपलक्ष्य में श्रीपंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन व श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के संयोजन में भव्य शोभायात्रा निकाली गयी। चंद्राचार्य चौक से शुरू हुई शोभायात्रा का शुभारंभ योगगुरू स्वामी रामदेव ने नारियल फोड़कर किया। बैण्ड बाजों व सुंदर झांकियों से सुसज्जित शोभायात्रा नगर भ्रमण के पश्चात राजघाट कनखल स्थित श्रीपंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन पहुंचकर संपन्न हुई। श्रद्धालु भक्तों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, विधायक मदन कौशिक, श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी, महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश, स्वामी ललित नंद गिरी, कोठारी जसविंदर सिंह, स्वामी नागेंद्र महाराज, स्वामी विपनानंद, पूर्व विधायक संजय गुप्ता सहित सभी तेरह अखाड़ों के संत महंत शामिल रहे।

शोभायात्रा का शुभारंभ करते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि संत महापुरूषों ने समाज को हमेशा कल्याण का मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीचंद्र ने पूरे देश का भ्रमण कर तत्कालीन समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर कर समरसता का वातावरण बनाया। सभी को भगवान श्रीचंद्र के दिखाए मार्ग पर चलना चाहिए। सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि संत परंपरा सनातन धर्म संस्कृति की वाहक है। जन-जन के आराध्य भगवान श्रीचंद्र ने समाज अध्यात्म और भक्ति का मार्ग दिखाया। श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के कोठारी महंत राघवेंद्र दास व कारोबारी महंत गोविंददास ने सभी संत महापुरूषों व अतिथीयों का आभार व्यक्त किया।

श्रीपंचायती अखाड़ा नया उदासीन के मुखिया महंत भगतराम महाराज ने कहा कि समाज को धर्म और अध्यात्म का ज्ञान देकर कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने वाले भगवान श्रीचंद्र का जीवन दर्शन सदैव समाज को प्रेरणा देता रहेगा। विधायक मदन कौशिक ने कहा कि संत महापुरूषों के सानिध्य में प्राप्त ज्ञान से ही कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। हरिद्वार के संतों की वाणी से प्रसारित होने वाले आध्यात्मिक संदेशों से पूरे विश्व को मार्गदर्शन मिलता है।

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(Udaipur Kiran) / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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