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Periods and Hair Washing : पीरियड्स के दौरान बाल धोने को लेकर अब और कन्फ्यूजन नहीं, जानें असली सच

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Periods and Hair Washing : हर महिला अपने जीवन में पीरियड्स के उन नाजुक दिनों से गुजरती है, जो न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी कई बदलाव लाते हैं। लेकिन आज भी हमारे समाज में पीरियड्स को लेकर खुलकर बात करना एक टैबू माना जाता है। शायद यही वजह है कि पीरियड्स से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं, जिन्हें हम बिना सोचे-समझे मानते चले आ रहे हैं। जैसे कि आपने कई बार सुना होगा कि पीरियड्स के दौरान बाल धोने से बचना चाहिए। ये बात पीढ़ियों से चली आ रही है और ज्यादातर महिलाएं इसे फॉलो भी करती हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण है या ये बस एक पुरानी मान्यता है? आइए, इस बारे में डॉक्टर की राय जानते हैं।

क्या पीरियड्स में बाल धोने चाहिए?

इस सवाल का जवाब देते हुए गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. ज्योति बताती हैं कि पीरियड्स के दौरान बाल धोने से बचने की सलाह के पीछे कुछ खास कारण हैं। उनके मुताबिक, पीरियड्स का ब्लड शरीर से बाहर निकलने के लिए शरीर में गर्माहट का होना बहुत जरूरी है। अगर शरीर में पर्याप्त गर्मी नहीं होगी, तो ब्लड सही तरीके से बाहर नहीं निकल पाएगा और यह शरीर में ही कहीं जमा हो सकता है। डॉ. ज्योति के अनुसार, इससे महिलाओं के शरीर में कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। यही वजह है कि पीरियड्स के दौरान बाल धोने से मना किया जाता है।

ज्यादा ठंडा पानी खड़ी करता है परेशानी

डॉ. ज्योति साफ करती हैं कि पीरियड्स में बाल धोने से फर्टिलिटी या बच्चेदानी पर कोई सीधा असर नहीं पड़ता। हालांकि, ज्यादा ठंडे पानी से बाल धोने से शरीर का तापमान और ब्लड फ्लो प्रभावित हो सकता है। लेकिन अच्छी खबर ये है कि अगर आप गुनगुने या हल्के गर्म पानी का इस्तेमाल करती हैं, तो कोई परेशानी नहीं होगी। हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह है कि पीरियड्स के दौरान बहुत ठंडे पानी से न सिर्फ बाल धोने, बल्कि नहाने से भी बचना चाहिए। गुनगुना पानी आपके शरीर के लिए ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक हो सकता है।

आखिर क्यों बना ये नियम?

धार्मिक और सामाजिक परंपराओं में भी कई घरों में पीरियड्स के दौरान बाल धोना मना माना जाता है। इसके पीछे सामाजिक और व्यावहारिक कारण ज्यादा जिम्मेदार हो सकते हैं। पहले के समय में गर्म पानी की सुविधा आसानी से उपलब्ध नहीं थी। कई महिलाएं नदियों या ठंडे पानी में ही नहाती थीं। ऐसे में शरीर का तापमान संतुलित रखने के लिए शायद ये नियम बनाया गया हो। इसके अलावा, उस दौर में साफ-सफाई की कमी भी एक बड़ी वजह हो सकती है। आज के समय में जब गर्म पानी और हाइजीन की सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हैं, तब इन पुरानी मान्यताओं को वैज्ञानिक नजरिए से समझना जरूरी है।

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